कौन सी है धर्मेंद्र की 10 बेहतरीन फिल्में ?

धर्मेंद्र की 10 बेहतरीन फिल्में

धर्मेंद्र की 10 बेहतरीन फिल्में

धर्मेंद्र, बॉलीवुड सिनेमा के The Handsome Boy Of Era कहे जाने वाले एक महान कलाकार है। 1960 में फिल्म Dil Bhi Tera Hum Bhi तेरे अपने करियर की शुरुआत करने वाले इस कलाकार को फ़िल्म्फरे अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। हमारे लिए उनकी फिल्मो में से 10 बेहतरीन फिल्मो को चुनना काफ़ी मुश्किल था। फिर भी हम ने अपनी समझ से उनकी इन 10 बेहतरीन फिल्मो को चुना है

  1. शोले ( 1975 )

वैसे तो इस फिल्म की कहानी से हिंदुस्तान का बच्चा – बच्चा वाक़िफ है। फिर भी आप को एक बार फिर से बता देते है की फिल्म की कहानी ठाकुर बलदेव सिंह के इर्द गिर्द घूमती है। जिनके परिवार को गब्बर सिंह नाम का एक डाकू मार देता है। गब्बर से बदला लेने के लिए ठाकुर 2 पेशेवर मुजरिमो को गब्बर से बदला लेने के लिए अपने गाँव रामगड बुलाते है। और वे दोनों मुजरिम उनसे बदला लेते है। बात करे फिल्म में कलाकारों की तो अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, हेमा मालिनी और अमज़द खान अहम् भूमिका में नज़र आते है। फिल्म के डायलॉग और कहानी सलीम- जावेद की जोड़ी ने लिखे है। फिल्म को डायरेक्ट किया है G P सिप्पी ने। शोले की कुल कमाई की बात करे तो फिल्म ने लगभग 30 लाख रूपए की लगत से बनी इस फिल्म ने 35 करोड़ रूपए की कमाई थी

2. सत्यकाम 1969 

1969 में आयी यह फिल्म बंगाली उपन्यास पर आधारित है। इसकी कहानी एक ऐसे आदमी के इर्द गिर्द घूमती है। जिसके दादा ने उसे सिर्फ सत्य की राह पर चलना सिखाया था। अंत में वह एक वैश्या से शादी करता है जो गर्भवती होती है जिसकी वजह से उसे समाज से कई तरह की बाते सुन्नी पड़ती है फिर भी वह सत्य की राह नहीं छोड़ता है। इस फिल्म में मुख्य किरदार में नज़र आते है धर्मेंद्र, शर्मीला टैगोर और संजीव कुमार। फिल्म को डायरेक्ट किया है ऋषिकेश मुखर्जी ने और फिल्म के डायलॉग लिखे है बिमल दत्ता ने।

3. दो चोर 1972

फिल्म की कहानी शुरू होती है चार अमीर लोगों के घरों में हुई रहस्यमयी चोरीयो से। चोर हर आमिर आदमी के घर से गहने चुरा  लेता हैं, हालांकि नकदी और अन्य आभूषणों को नहीं छूता हैं, और एक स्वस्तिक का एक निशान छोड़ देता है। पुलिस को संदेह होता है कि टोनी (धर्मेंद्र) ने ही यह सभी चोरिआ करी है, हालांकि वह निर्दोष होने का दावा करता है। वह यह पता लगाने की कोशिश करता है कि असली चोर कौन है और अमीर आदमियों के यहाँ चोरी करने वाली संध्या (तनुजा) को पकड़ता है। वह उसे बताती है कि वह वो गहने वापस ले जा रही है जो उसकी विरासत है, क्योंकि वो गेहने उसकी मां (शोभना समर्थ) के हैं, जो ये  4 लोगों ने उसके पिता के जीवन के मरने  के बाद उसकी माँ से छीन लिए थे। उसकी मां अब मेन्टल हॉस्पिटल में है। टोनी और संध्या को प्यार हो जाता है। वह उसे अपने सभी गहने दिलवाने में मदद करता है और उन चारो लोगो को सलाखों के पीछे डलवा देता है। उधर संध्या की माँ फिर से ठीक हो जाती है। टोनी और दोनों एक साथ रहने का फैसला करते है।

4. नया ज़माना  1971

अनूप (धर्मेंद्र) एक जूझारु लेखक एक रूप में नज़र आते है। एक दिन वह अमीर और उत्कृष्ट सीमा (हेमा मालिनी) से मिलता है और दोनों एक दूसरे के प्यार में पड जाते है। जब इस रिश्ते का पता सीमा के भाई राजन चौधरी (प्राण) को पता चलता है, तो वह गुस्से में आ जाता है और सीमा को अनूप से मिलने के लिए मन कर देता है। फिर अनूप की बहन, रेखा (अरुणा ईरानी), और राजन के भाई महेश (महमूद) को एक दूसरे से प्यार हो जाता है। यह राजन को बहुत ज़्यादा नाराज़ हो जाता है और वह महेश को अपने घर से बाहर निकाल देता है। राजन को पता चलता है कि अनूप ने “नया ज़माना” नामक एक किताब लिखी है, और इसे अपने नाम के तहत वितरित करने और इसे बेचने का विकल्प चुनता है। अनूप और सीमा को पता चलता है कि उनकी किताब बहुत ज़्यादा पॉपुलर हो गयी है  और बहुत ज़्यादा बिकी है। राजन जो की एक निर्र्लज वयक्ति है,  वो अनूप और उसकी माँ (ललिता पवार) के साथ छोटे अपार्टमेंट में रहने वाले बेसहारा व्यक्तियों को बाहर निकलने का प्रयास करता है, उसकी इस बात का अनूप और सीमा विरोध करते हैं, और इस तरह राजन अपने सहयोगियों सीताराम (जानकीदास) द्वारा अपार्टमेंट को बुरी तरह से जलाने का आदेश देता है। और इसका इलज़ाम अनूप पर लगा देता है जिसके बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। सीमा के पिता सचिन चौधरी (अशोक कुमार) सीमा को अनूप से मिलने के लिए मन कर देते है, ताकि वो ग़रीब  व्यक्तियों से दूर रह सके। सीमा को अब अपने पिता और पति में से किसी एक को चुनना होता है।

5. जुगनू1973

जुगनू (अंग्रेज़ी: जुगनू) प्रमोद चक्रवर्ती द्वारा 1973 निर्देशित की एक भारतीय हिंदी फ़िल्म है। कहानी है एक बड़े दिल वाले (धर्मेंद्र)  चतुर chor के बारे में है,। फिल्म में हेमा मालिनी, ललिता पवार, महमूद, प्रेम चोपड़ा, नजीर हुसैन, अजीत और प्राण हैं। संगीत एस डी बर्मन का है और बोल आनंद बख्शी के हैं। यह एक फिल्म इंडस्ट्री की  सुपरहिट फिल्म साबित हुई, जो 1973 की दूसरी सबसे अधिक कमाई वाली फिल्म बन गयी। इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट साबित हुए। फिल्म का एक और ज़बरदस्त हिस्सा है इस फिल्म के डायलॉग जैसे , “बाप के नाम का सहारा कमज़ोर लॉग लेटे है”, जिसका अर्थ है: “अपने बाप के सहारे पर जीने वाले लोग , जिसे धर्मेंद्र ने दो घटनाओं पर कहा था। बाद में ये फिल्म इंडस्ट्री का प्रचलित डायलॉग बन गया । जुगनू हिंदी फिल्म की एक महान फिल्म साबित हुई । फिल्म को 1980 में तमिल भाषा में बनाया गया जिसका नाम गुरु रखा गया।

6. अलीबाबा और 40 चोर

अलीबाबा, (धर्मेंद्र) में मरजीना (हेमा मालिनी) के साथ रहता है। शहर में एक शासक, अबू हसन है। गुलबा को हमेसा डकैतों से खतरा रहता है। अली बाबा डाकुओं के गुफा के प्रवेश करने का पासवर्ड जान जाता हैं और गुफा से बहुत सारे गहने ले अता हैं। बाद में उसका भाई भी यही कोसिस करता पर उसे डकैत मार देते है  क्योंकि वह पासवर्ड भूल जाता है और  पकड़ा जाता है। एक छोटी लड़की जिसके पिता को डकैतों (ज़ीनत अमान) द्वारा मार दिया गया है वहअ बू हसन के साथ बदला लेना चाहती है। अबू हसन डकैतों के नेता बन है और उसे पता चलता है कि अली बाबा गुफा में आता हैं। उसने अली बाबा को मारने के लिए 40 कलशों के  अंदर 40 चोरो को बिठा देता है।अली बाबा को इस बारे में पता चलता है और वे सभी को मौत के घात उतार देता है। वह सबको ये बता कर चौंका देता है  कि उनका  अपना राजा ही डकैतों का मुखिया होता है। फिल्म को डायरेक्ट किया था उमेश मेहरा और लतीफ़ फ़िज़ियेव ने।

7. यादो  की बारात 1973

तीन भाई अपने पिता की हत्या के बाद अलग हो जाते हैं। काफी लम्बे समय के बाद उन्हें अपने पिता का बदला लेने की चाह उन्हें एक गाने के ज़रिये मिलवाती है जो उन्होंने बचपन में याद किया था। फिल्म में धर्मेंद्र के साथ ज़ीनत अमन और विवेक अरोरा मुख्य भूमिका में नज़र आते है। फिल्म को डायरेक्ट किया था नासिर हुसैन ने और जावेद अख्तर ने इस फिल्म के बोल लिखे थे।

8. मेरा गांव मेरा देश 1971

अजित ने अपने गांव को डाकुओं (अपराधियों) से बचाने की कसम खाता है और उसे अंजू से प्यार हो जाता है। फिल्म में मुख्य भूमिका में नज़र आते है धर्मेंद्र, आशा पारेख और विनोद खन्ना। फिल्म को डायरेक्ट किया है राज खोसला ने और स्क्रीनप्ले लिखा है G R कामथ।

9. आये दिन बहार के 1966

रवि जोकि एक होनहार लड़का है, जो अपनी माँ के साथ रहता है।  वह  कंचन से मिलता हैं और दोनों को प्यार हो जाता हैं। हालांकि, उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, रवि को जल्द ही पता चलता है कि वह एक अविवाहित महिला का बच्चा है और इसलिए उसकी शादी टूट जाती है। फिल्म में आशा पारेख, धर्मेंद्र और बलराज साहनी प्रमुख भूमिका में नज़र आते है। रघुनाथ झलानी ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया था।

10. दिल्लगी 1978

इस फिल्म में धर्मेद्र एक  संस्कृत शिक्षक के रूप में नज़र आते है जो  एक युवा महिलाओं के स्कूल में निर्देश देने आता है। उनकी शिक्षा की शैली पर विज्ञान की टीचर (हेमा मालिनी) चिढ़ जाती हैं। धर्मेद्र को साइंस की टीचर से प्यार हो जाता है और वह उसे इम्प्रेस करने की कोसिस करता है। फिल्म में धर्मेंद्र, हेमा के साथ मीठू मुखर्जी अहम् भूमिका में नज़र आते है और फिल्म को डायरेक्ट किया है बासु चटर्जी ने।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *