अमिताभ बच्चन की 10 बेहतरीन फिल्मे

अमिताभ बच्चन

यदि किसी को भारत का महानायक कहा जाना चाहिए तो वह और कोई नहीं श्री अमिताभ बच्चन जी ही होंगे। इन्हे बॉलीवुड का भीष्म पितामह भी कहा जाता है। 11 अक्टूबर 1942 में जन्मे श्री अमिताभ बच्चन जी का हिंदी सिनेमा में योगदान अतुल्य है। वह एक ऐसे अदाकार है जिनके लिए सुपरस्टार शब्द या यु कहे मेगास्टार शब्द भी कम है। वह एक ऐसे व्यक्ति है जिनका व्यक्तित्व अपने आप में एक धर्म है। जिनके पिछले 4 दशको में दुनिया भर में अरबो फैन बने है। यदि आप को यकीन न आये तो मुंबई में स्थित उनके घर पर लगी हुई भीड़ को देख कर उनके चाहने वालो का अंदाज़ा आप लगा सकते है। यु तो अमिताभ बच्चन की 10 बेहतरीन फिल्मे चुनना बहुत मुश्किल काम है पर हम एक छोटी सी कोशिस कर सकते है।

10 जंजीर 1973

जंजीर प्रकाश मेहरा की वो फिल्म थी जिसने बॉलीवुड को एक नया स्टार दिआ था। यह फिल्म अमिताभ बच्चन जी के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई जिसने उन्हें बॉलीवुड का एंग्री यंग मेंन  बना दिया था। यह फिल्म उस वक्त आयी जब भारत का हर जवान आदमी रोमेंटिक कहानी को छोड़ कर कुछ ऐसा देखना चाहता था जिसमे वो अपने आप को महसूस कर सके। अमिताभ बच्चन ने उस वक्त वो चेहरा दिखाया जो समाज के नियम  और कानून  को बदलने के लिए उनसे लड़ सकता था ॥

इस फिल्म का सर्वश्रेष्ठ डाइलॉगे है : जबतक बैठने को न कहा जाए खड़े रहो ये पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं।


9 अभिमान (1973)

एक कलाकार को कलाकार तब मन जाता है जब वह अपनी बहुमुखी प्रतिभा को साबित करता है। श्री अमिताभ बच्चन जी ने अपनी ये विविधता हमें अपनी फिल्मो मैं दिखाते रहते है । साल १९७३ में अमिताभ बच्चन की ये दूसरी फिल्म थी जिसमे उन्होंने जंजीर फिल्म से बिलकुल उलट किरदार किया था। इस फिल्म में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन साथ में नज़र आये थे।

इस फिल्म का बेहरीन डायलॉग है: पहले मैं अकेला था, अब बिलकुल अकेला हूँ


8 दीवार (1975)

इस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति का किरदार अदा करते हुए दिखे है जो अपनी बचपन की परिस्थितियों के कारण शहर का मशहूर बदमाश बन जाता है। शशि कपूर जिन्होंने इस फिल्म में अमिताभ के छोटे भाई और एक पुलिस वाले का किरदार अदा किया है। दीवार अमिताभ बच्चन के लिए एक ऐसी फिल्म साबित हुई जिन्होंने उन्हें रातो रात इंडस्ट्री का सुपरस्टार बना दिया और उनको इस फिल्म का वो क्लिस्ट सीन है जब दोनों भाई अपनी माँ को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए अपने साथ ले जाना चाहते है

सबसे अच्छी बातचीत: “मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठता

7. डॉन 1978

अमिताभ बच्चन के किरदारों की यात्रा जो उन्हें एक समाज के युवा जो न्याय के लिए लड़ता है और उसके बाद उन्हें डॉन तक ले गयी। उन्होंने इस फिल्म में दो अलग किरदार अदा किये है जिसे वह एक तरफ माफिया डॉन बने है और दूसरी तरफ एक गाँव के गवैये का किरदार अदा किया है जो की डॉन के मरने के बाद पुलिसवालो के लिए एक जासूस बनता है। यह अमिताभ बच्चन की बेहतरीन फिल्मो में से एक बानी जो की एक गोल्डन जुबली फिल्म साबित हुई। जिसके डाइलॉगे आज भी सभी की जुबान पर आसानी से आ जाते है जैसे डॉन का इंतज़ार तो 11 मुल्को की पुलिस कर रही है पर डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

6 मुक्कदर का सिकंदर (1978)

1978 में अमिताभ बच्चन की परकाश मेहरा के साथ एक और सुपरहिट मूवी थी । इस फिल्म में उस वक़त की मशहूर जोड़ी रेखा और अमिताभ को देखने के लिए दर्शको की लाइन सिनेमा घरो के बहार देखने को मिली थी।विनोद खन्ना, राखी और अमजद खान जैसे सितारों से आने वाले समर्थन के साथ; फिल्म को भारी सफलता मिली । ये वो फिल्म है जिसकी टिकट खरीदने के लिए लोग सिनेमा घरो के बाहर बिस्तर लगा कर सो जाते थे।

इस फिल्म का सबसे बढ़िया डाइलोगे है : मकान ऊँचा बनाने से इंसान थोड़े ही ऊंचा हो जाता है ।

5 बाग़बान (2003)

ये फिल्म अमिताभ बच्चन की फिल्मी दुनिया की सेकंड इननिंग मूवी कह  सकते है। इस फिल्म की कहानी हेमा मालिनी और अमिताभ बच्चन के साथ उनके बच्चो द्वारा किया गया बुरा व्यव्हार दिखाया गया है और इसे देखने के बाद सिनेमा घर में आने वाले हर व्यक्ति की आँखों में आंसू आ गए थे । इस फिल्म में जिस तरह से अमिताभ बच्चन ने अपना किरदार अदा किया है उसे देखने के बाद ये आसानी से तय किया जा सकता है की क्यों अमिताभ बच्चन को फिल्म इंडस्ट्री का महानायक कहा जाता है।

इस फिल्म की एक लाइन को सुनने के बाद हर पारिवारिक आदमी अपने आप को इस फिल्म के साथ आसानी से जोड़ सकता है और वो लाइन है : अगर एक बाप अपने बच्चे को पहला उठाने में मदद कर सकता है तो एक बच्चा अपने बाप का आखरी कदम में सहारा क्यों नहीं बन सकता है।

4 शराबी

इस फिल्म की कहानी एक शराबी करोड़पति बाप के एक लोतै  लड़के के इर्द गिर्द घूमती है जो हर वक्त दारु के नशे में रहता है । जिसका किरदार स्वयं अमिताभ बच्चन ने अदा किया है जो हर वक्त नशे में तो रहता है पर उसके पास एक सोने जैसा दिल भी होता है ये अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा की लगातार छठी फिल्म थी जिसने  बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर जुबली की थी ।

इस फिल्म के लिए दर्शको का प्यार ऐसा है की इसका डाइलोगे आज भी बोला जाता है : मुछे हो तो नत्थू लाल जैसी

3. अग्निपथ

अग्निपथ वो फिल्म है जिसका रीमेक हम देख चुके है जिसमे ह्रितिक रोशन लीड रोल में दिखे थे । विजय दीनानाथ चौहान का वो अविश्मरणीय किरदार अमिताभ बच्चन द्वारा अदा किया गया जो की सदी की कल्ट फिल्मो में से एक साबित हुई । इस फिल्म के लिए श्री अमिताभ बच्चन जी को नेशनल फिल्म पुरस्कार भी दिया गया ।

2. सरकार

क्या सरकार का किरदार अदा करने के लिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अमिताभ बच्चन से बढ़िया पसंद कोई हो ही नहीं सकता है ? जो समाज में बने दोषो से अपने दम पर अकेला लड़ता है। अमिताभ ने अपने प्रशंसकों को इस फिल्म में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से मंत्रमुग्ध कर दिया। इस फिल्म की चाहत ने अपने दर्शको एक चुमबक की तरह घरो से सिनेमा घरो तक खीज लायी।

बेस्ट डायलॉग : मुझे जो सही लगता हूँ में वो करता हूँ फिर वो चाहे भगवान् के खिलाफ हो, समाज के खिलाफ हो, पुलिस, कानून या फिर पूरे सिस्टम के खिलाफ क्यों न हो ।

1. पा

अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म में एक ऐसा  किरदार अदा किआ है जिसके बाद उन्होंने एक बार फिर से साबित किया की वो बॉलीवुड के महानायक क्यों है । उन्होंने एक ऐसे १३ साल के बच्चे का किरदार अदा किया जो प्रोगेरिआ नाम की बिमारी से पीड़ित होता है जिसमे एक बच्चा कम उम्र में ही बूढ़ा दिखने लगता है । ये पहली बार हुआ था जिसमे एक बाप बेटे की जोड़ी एक साथ परदे पर नज़र आयी थी । इस फिल्म में अभिषेक बच्चन ने अमिताभ बच्चन के बाप का किरदार अदा किया था ।

इस फिल्म में अमिताभ की मासूमियत और अपार हुनर को देखने के बाद आपकी आंखें चौड़ी और जबड़े खुले  रह जाएंगे। यह फिल्म बेहद खूबसूरत है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि आप इसे कई बार देखना पसंद करोगे 

सर्वश्रेष्ठ डायलॉग: ये मेरा तेरा, तेरा मेरा . दूनिया का सबसी बैदी समस्या है।

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